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विजयदशमी पर्व 2020

  विजयदशमी पर्व 2020 विजय दशमी पर जोश और खरोश है, पर चारो तरफ कोरोना का प्रकोप है। बच गया रावण भी आज जलने से, क्योंकि जनता को भी सामाजिक दूरी का होश है। पर रावण हर बार तुम नहीं बच पाओगे, जो कर्म तुमने किये हैं उसका फल तो पाओगे। इस बार तो कोरोना ने डरा दिया और बचा लिया, पर अगले साल कोरोना मुक्त विजयदशमी मनाएंगे। मेरी ✍️से सज्जन सिंह 25.10.2020

धूप और बारिश

 धूप दिखा के भिगो देते हो! हे प्रभु युग बीत गए पर छल की आदत नहीं गयी, हम सूरज दादा को दुआ देते रह गए, निगोड़े बादलों को कोसते रह गए, पर क्या पता था इन सब के पीछे आपका चरित्र है, परेशान रहते थे इसी आपके चरित्र से देव और दानव, तो हमारी क्या विसात है हम तो ठहरे मानव, और इस मानव युग मे कोरोना छाया हुआ है, भीगने से सर्दी जुकाम और बुखार आया हुआ है, पर आपको क्या आप मुस्कराओ, यमराज से बोल कर विकेट पर विकेट गिराओ, आपको कौन सा आइसोलेशन में जाना है, आपको तो इंद्र लोक में अप्सराओं के साथ चैन की बंशी बजाना है, विनती है प्रभु धूप और बारिश का समय बाट दो, जब धूप हुई हो तो बारिश का कनेक्शन काट दो। #इंद्र_देवता मेरी✍️से सज्जन सिंह 18.08.2020

का बा...

रुपईपुर में का बा…!!! ताल बा गाड़ा पात बा, रोहू,कतला,साग बा, नहर बा रेत बा, चारो तरफ खेत बा, टिबुल बा नाली बा, पर ओहमें ना पानी बा। का बा… स्कूल-अस्पताल ना बा का? प्राइमरी बा मिडिल बा, दसवीं और बारहवीं बा, डिस्पेंसरी के नाम बा, आयुर्वेदिक अस्पताल बा। का बा... बाग बा बगीचा बा, खेत खलिहान सब सींचा बा, छान,छप्पर,रोटी बा,  बड़का बाबू के कोठी बा। का बा... डीह बाबा,काली माई, चतुर्भुज बाबा,सप्तमी माई, दुआरे दुआरे इनार बा, साइकिल,बाइक,कार बा, भैस-गाय मुर्गा - मुर्गी बा, नाइ,धोबी,दरजी बा। का बा..अउर रोजगार ना बा का? साहेब बाटेन बाबू बाटेन,  झौआ भर अध्यापक बाटेन, दरे दरे दुकान बा,  समोसा चाट पकवान बा, आधा गांव कमात बा,  बाकी बइठि के खात बा, दिल्ली मुंबई कमात बा, रुपया सब गांव में जात बा। हमरे गऊआ के शान बा, खेती करत किसान बा। का बा.... दाल भात तरकारी बा,  इहा न कोई भिखारी बा, कीर्तन भजन अउर कजरी बा, होली दीवाली हुड़दंग बा, इहा सबै दबंग बा, देशी बा अंग्रेजी बा,  गांजा चिलम बीड़ी बा, खैनी पान सरौता बा। का बा.... बेटवा,बिटिया,मेहरारू बा, ट्रैक्टर खड़ा दुआरी बा, किसान बा जवान...

राजनीति एवं समाज 2

आदत ना डालो मुझे यूँ पढ़ने की,या तो ऊब जाओगे या फिर डूब जाओगे। राजनीति एवं सामाजिक चिंतक: सज्जन सिंह

राजनीति एवं समाज

  उत्तरप्रदेश की राजनीति में ब्राम्हणों की स्थिति। सियासत और सत्ता के 'ड्राइवर' रहे ब्राह्मण अब 'स्टेपनी' हो गए हैं।लगभग 12% जनसंख्या होते हुए भी पिछले 30 साल से कोई पार्टी ब्राम्हण मुख्यमंत्री नहीं बनाई ।कारण ब्राम्हणों ने अपनी विश्वसनीयता खोई कभी एक पार्टी के साथ नहीं रहे।कभी मायावती कभी मुलायम सिंह कभी बीजेपी इस लिए पार्टियों को लगने लगा कि ये चलायमान हैं।और कांग्रेस जिसने 6 मुख्यमंत्री ब्राम्हण बनाये उससे ब्राम्हण दूर होते गए क्यो??? ब्राम्हणों को आत्मचिंतन की जरूरत है।ब्राम्हणों को या तो मजबूती से कांग्रेस की तरफ वापसी करना चाहिए या अन्य किसी एक पार्टी के साथ जुड़ के रहना चाहिए।ये ब्राम्हण सम्मेलन करने वाली पार्टियों को ये अहसास कराना चाहिए कि ब्राम्हण कोई वंचित वर्ग नहीं है। राजनीति एवं सामाजिक चिंतक: मेरी ✍️से सज्जन सिंह 10.10.2020