होली

 होली...

जली होलिका खत्म द्वेष सब, आओ खेलें होली.

राग द्वेष सब भुल कर,  बन जाओ हमजोली.

रंग गुलाल नीर और केशर , और बच्चों की टोली.

स्त्री - पुरूष  और बच्चे क्या, भंग सभी नें पी ली..

मित्र - शत्रु सब गले मिले,बधाई सबकी ले ली .

जली होलिका खत्म द्वेष सब, आओ खेलें होली।

मेरी ✍️से

सज्जन सिंह

०५.०३.२०१५

05.03.2015


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