राजनीति एवं समाज
उत्तरप्रदेश की राजनीति में ब्राम्हणों की स्थिति।
सियासत और सत्ता के 'ड्राइवर' रहे ब्राह्मण अब 'स्टेपनी' हो गए हैं।लगभग 12% जनसंख्या होते हुए भी पिछले 30 साल से कोई पार्टी ब्राम्हण मुख्यमंत्री नहीं बनाई ।कारण ब्राम्हणों ने अपनी विश्वसनीयता खोई कभी एक पार्टी के साथ नहीं रहे।कभी मायावती कभी मुलायम सिंह कभी बीजेपी इस लिए पार्टियों को लगने लगा कि ये चलायमान हैं।और कांग्रेस जिसने 6 मुख्यमंत्री ब्राम्हण बनाये उससे ब्राम्हण दूर होते गए क्यो??? ब्राम्हणों को आत्मचिंतन की जरूरत है।ब्राम्हणों को या तो मजबूती से कांग्रेस की तरफ वापसी करना चाहिए या अन्य किसी एक पार्टी के साथ जुड़ के रहना चाहिए।ये ब्राम्हण सम्मेलन करने वाली पार्टियों को ये अहसास कराना चाहिए कि ब्राम्हण कोई वंचित वर्ग नहीं है।
राजनीति एवं सामाजिक चिंतक:
मेरी ✍️से
सज्जन सिंह
10.10.2020
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें