उम्र

 उम्र

जमाना खराब है या यह समय खराब है,

इसी में उलझा रहा मन मेरा बस यूं ही।

लोग तो अच्छे हैं तो जमाना क्यों खराब है,

समय का क्या वह कहा रुकता है कही।

ये मौसम बीत जाने दो कहते रहे हम,

फिर घूम के आ गयी बारिस और उमस।

शायद बसन्त में सोचे होते तो ठीक था,

जब नए नए से थे मैं और तुम।

अब तो वही जाड़ा वही गर्मी है,

अब तो वही खासी जुकाम सर्दी है।

भागते रहे उम्र भर ठहराव के लिए,

उम्र का क्या वह कहा रुकती है।


मेरी ✍️से

सज्जन सिंह

19.07.2021




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