स्वतंत्रता की पावन बेला…..!!! हे जन इस बेला में वह, ओज फिर दिखला दो। नवभारत की नींव हिल रही, इसको जरा टिका दो। जात-पात से दूर एक, समृद्धि समाज बना दो। अंग्रेज तो चले गए, अंग्रेजियत जरा मिटा दो। कृष्ण-राम की धरा में, नवचेतना का दीप जला दो। नव विधान का संविधान, फिर से एक बना दो। मेरी ✍️से सज्जन सिंह 14.08.2021
स्वर्णपदक-नीरज चोपड़ा-ओलंपिक 2021 भाला फेक के भारत माँ के भाल का मान बढ़ाया है। सात समंदर पार तुमने जापान में तिरंगा फहराया है। सवर्ण-पदक सौ-साल के सूखे में वर्षा बन के आया है। सूरज-चंदा-तारा बन जन-जन का मन हर्षाया है। नाम की तरह खिल कर के ही वापस आया है। पानीपत के लाल-बाल ने देश का मान बढ़ाया है। मेरी ✍️से सज्जन सिंह 07.08.2021
खेत थे बड़े बड़े सब बट गये, बड़ा था परिवार पर अब घट गये, सांस तक थी आस पर छूट गयी जिंदगी भी शायद हमसे रूठ गयी काल कवलित मेरे दो भाई हुये माँ बाप यादों में है समाए हुये पूर्वजों की जागीर के लिए सब जग गये, फिट फिट जमीन के लिये लड़ गये, दोष जितना सबका है उतना मेरा भी है, न बटे जमीन क्यों न हम अड़ गये। माँ के जेवर का सबको ध्यान था कर्ज का नहीं किसी को भान था। टपकती छत भूल गये,दिन कैसे गुजरे भूल गये, नया मकान याद रहा उस पर ही अभिमान रहा। मेरी ✍️से सज्जन सिंह 08.05.2023
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